Sunday, 1 November 2015

"मस्तिष्क की कहानी"
मस्तिष्क मे हमे जिन्दा रखने की अदभुत क्षमता होती है ।मस्तिष्क  संग्रहण  करता है हमरे विचारो का,हमारे अनुभवों का,हमारे ज्ञान का और  इसके अलावा मस्तिष्क  का समबन्ध होता है प्रकृति से।
मस्तिष्क बचाव और आक्रमण दोनों में कुशल होता है । आइये मस्तिष्क के बारे में कुछ चर्चा करे। 


अ. मस्तिष्क के भूलने के कारण:
मस्तिष्क स्वयं  को जिन्दा कभी कभी अदभुत बर्ताव करता है । 
उदाहरण :अमित को नौकरी में अक्सर तनाव का समाना करना पड़ता है ।अमित के घर पर भी तनाव रहता है। घर और नौकरी के  तनाव  के कारण  उसे हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत  हो गयी,वह हमेशा बैचैन  रहने लगा । 
 तनाव'को लम्बे समय तक झेलने के बाद अमित के मस्तिष्क ने एक विचित्र बर्ताव करना शुरू  कर दिया । उसके मस्तिष्क ने तनाव  देनेवाले व्यक्ति की बातों को भूलना और अनसुना करना कर दिया,उसे ज्यादा नींद   लगी ,यह सब   विचित्र  हो गया । वह  सोचने  लगा  ऐसा क्यों हो रहा है । 
मस्तिष्क को जब लगने लगा अमित की परस्थितिया ज्यादा तनाव देने लगी है। तब मस्तिष्क ने अत्यधिक तनाव देनेवाली परस्तिथियो से बचने का मार्ग निकाला  और उन अनसुना करने लगा ।
माना  की इससे अमित की पेरशानी बढ़ने लगी परन्तु मस्तिष्क ने कुछ समय तनावरहित रहने के लिए कुछ बातों को भूलना बेहतर समझा ।
यहा पर मस्तिष्क स्वयं के बारे में सोच रहा है ना  की बाहर की परस्तिथियो के बारे मे। 



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